मुकुन्द मयंक केर एकांकी ‘राजा’

युवा रंगकर्मी मुकुन्द मयंक बाल श्रम आधारित  एकटा एकांकी लिखबाक प्रयास केलनि अछि. साझा कयल जा रहल अछि, पढ़ि केँ कहू – माॅडरेटर

पुरुष पात्र :-

1 सुरेश (35 वर्ष).2 राजकुमार(42 वर्ष) .3 राजा (12 वर्ष)

स्त्री पात्र – बड़का गाम वाली  (32-33 वर्षक)

दृश्य –1

  (बाट पर एकटा छोट-छीन चाह-पानिक दोकान ; जाहि ठाम राजकुमार आ सुरेश ठाढ़ भ’ चाह पीबि रहल छथि )

सुरेश:- रामकुमार भाइ सुनलहुँ  जे अहाँकेँ तँ प्रमोशन भ’ गेल अछि यौ

राम कुमार :- हँ हँ ठीके गप्प छै ई . आब तँ खाली साहेब संग कोनो मीटिंग मे जाउ नहि तँ ऑफिस मे दिन भरि बैसल रहू बस ,बाल श्रम मंत्रालय विभागमे आर काजे कोन छै तखन तँ झूठे सरकार …छोरु ई सब अपन सुनाउ !

सुरेश :- धुर की कहु हम तँ परेशान  छी अय प्राइवेट नोकरी सबसँ , आय एतय तँ काल्हि ओतय जतय कनी बेसी पाय दैत अछि ओतय चलि जायत छी .

   ताहि परसँ ई महँगी

( तखने एकटा 12 बर्खक छौड़ा चाह लेने आबैत छै आ दुनु गोटेक हाथ मे चाह द’ क’ जाय लागैत अछि,  की रामकुमार पुछैत छथि )

रामकुमार :- रौ रौ…कनी एम्हर सुन तँ

राजा:- की भेल मालिक पानि लेब की !

रामकुमार :- नहि-नहि. की नाम छौ तोहर ?

राजा:- लोक सब राजा कहै छै मालिक

रामकुमार :- कतेक पाय दैत छौ ई दोकान बला ?

राजा:- बारह सौ टाका आ दूनु सांझक भोजन.

रामकुमार :- हमरा घर मे काज करबें ! पन्द्रह सौ देबौ आ चारि बेर खाय लेल. बाज- चलबें ? ,आ काजो किछ नहि

(ताबत सुरेश पेपर देख’ लागैत अछि )

राजा :- मालिक मुदा ई दोकन बला तँ नहि जाय देत !

रामकुमार :- राति मे भागि के बजरंगबली मन्दिर लग आबि जहियें हम ठाढ़ रहबौ.

राजा:- ठीक छै मालिक.

(राजा चलि जायत अछि आ सुरेश पेपर राखैत बाजैत छथि)

सुरेश :- ओहि बच्चासँ की गप्प करै छलहुँ ?

रामकुमार :- घर मे काज करबाक लेल एकटा आदमी के खगता छल ओहि बास्ते एकरा सँ गप्प करै छलहुँ.

सुरेश:-मुदा ई तँ बड़ बच्चा छै अखन, आ कानूनी रूपसँ सेहो ई गलत भेलै ने !

रामकुमार :- कोन कहै छै हमर साहेबक घरमे तँ एहि सँ छोट बच्चा काज करैत छै ; सरकार के नियम अपना जगह छै , ई सब काज नहि करतै तँ सरकार लोकक घर मे बर्तन धोय लेल एतै की ? चलू सांझ भ’ गेलै

( नेपथ्य सँ मधुर संगीतक अवाजक संग रौशनी बन्द होयत अछि )

दृश्य 2

(स्थान-रामकुमारक घर )

दोकान पर काज करै बला बच्चा झाड़ू लगा रहल अछि भीतरसँ बड़कागाम वाली एक मोटा कपड़ा लेने आबैत छथिन आ राजा केँ देखा क’ फ़ेक दैत छथिन

बड़का गाम वाली :- रौ छोड़ा झाड़ू लगा केँ ई सबटा कपडा साफ क’ दिहैन आ सुन कल्हुकेँ जकाँ मैल लगले नहि छोड़ि दिहैन !

राजा:- चाची किछु खाय लेल दिअ ने ?

बड़का गाम वाली :- पहिने कपड़ा खीचि ले तखन राखल छौ ठूसि लिहें

( दोसर घर सँ राजकुमार निकलैत छथि )

राजकुमार :- रै छोड़ा हमर जुत्ता साफ केलें की ने ?

राजा:- नहि कखन करितहुँ हैया एखने क’ दैत छी

राजकुमार :- तोरा tv देखबा सँ फुरसति रहतौ तखन ने जल्दी कर ?

(रामकुमार एना तमसायत छथि जेना राजा कतेक बड़का गलती क’ देने होय , रामकुमार सोफा पर बसि रहैत छथि आ राजा जुत्ता पाॅलिस करय लागैत अछि )

रामकुमार :- सुनै छी यै जायत छी

(बड़का गाम वाली भीतरसँ आवाज दैत छथिन जे हम कहलौ से सब नेने आयब बिसरबै नहि )

पटाक्षेप

दृश्य 3

समय :- सन्ध्या काल

( राम कुमार आ बड़कागाम वाली खूब बनि ठनि क’ कतहुं जेबाक लेल तैयार छै )

रामकुमार :- दिन मे रोशन फोन केने छल.

बड़कागाम वाली:-  की कहैत छल ?

राम :- पाय पठाब’ लेल .

बड़कागाम वाली:- कनिये दिन पहिने तँ पठेने छलियै !

रामकुमार :- हँ हँ से तँ बुझलिए , ओ कॉलेज मे कोनो फ्रेसर त्रेसर पार्टी छै ताहि कारण माँगलक , कोन कहै छै, पठा देबै 

बड़कागाम वाली:- बुझु अँहा आ बुझत अँहा केँ दुलरवा बेटा , हम्मर की जायत !

(राम कुमार राजा के आवाज दैत छथि राजा मंच पर आबैत अछि )

राम कुमार :- रौ हम सब आबैत छियौ , भ’ सकैत अछि राति भ’ जाय ( बड़कागाम वाली दिस ताकैत ) यै एकरा काज सब देखा देलियै

( आ tv केँ तार छोड़ा राखि दैत छै )

राजा :- नहि हमरा ड़र लागत हमहुँ जायब अहाँ संगे घुम’ लेल .

बड़कागाम वाली :- हँ हँ तोरा नीक नीक भोजन चाही , तुं tv देखमे आ काज करै बेर तोरा नींद लागैत छौ आ आब तुं हमरा सब संगे घूम’ लेल सेहो जेबे कहलकै जे । चुपचाप बर्तन मांजि दिहें, भोर केँ उठैत नहि रहैत छें ।

राजा:- खाली अँहा सब काजे करबैत छी ठीकसँ खाइयो लेल नहि दैत छी , एहि सँ नीक तँ हम्मर ओ मालिक छल कम सँ कम नीक सँ खाय लेल तँ दैत छल , कहियौ काल छाल्ही सेहो दैत छल अहाँ तँ खाली बसिया रोटी दैत छी 

( रामकुमार आँगा बढ़ि राजा केँ एक थापर लगा दैत छै  राजा खसि पड़ैत अछि )

रामकुमार :- नहि तोरा घी मल्लीदा दियौ तु हमर जमाय छें ने !

बड़कागाम वाली :- चलू लेट भ’ जायत ,एकर इलाज भ’ गेलै , बाहरसँ ताला मारि दियौक.

(राम कुमार आ बड़कागाम वाली चलि जायत अछि, राजा कानैत ओतय सुति रहैत अछि । मंच पर धीरे धीरे प्रकाश कम होयत अछि आ एकटा करुण ध्वनि तेज होयत अछि  )

 संपर्क :

मुकुन्द मयंक 

ईमेल :mukundjee.mayank@gmail.com 

मोबाइल: 09334359514

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *