प्रेमक बसात मे बहैत वा बहकैत हमर लेखनी

फ़िल्म समीक्षा :: किसलय कृष्ण

२ नवम्बर, २०१८ भोर ९:३० मे किरायाक स्कार्पियो पर सवार भए  सहरसा सँ बिहारीगंज लेल विदा भए  गेल छी। बिहारीगंज मने मधेपुरा जिलाक एकटा कस्बा। जेबाक कारण अछि बहुप्रतीक्षित मैथिली फिल्म ‘प्रेमक बसात’ जे आइ मिथिला क्षेत्रक ३१ गोट विभिन्न सिनेमाघर मे रिलीज भए  रहल अछि आ ताहि मे सँ एकटा अछि बिहारीगंजक राधिका टॉकिज। गाड़ी उभर-खाभर बाट पर बढ़ल जा रहल अछि आ हमर मानसपटल मैथिली सिनेमाक इतिहास मे ओझरायल। मधेपुरा जिला मे आइ पहिल उपस्थिति थिक मैथिली फिल्मक, ममता गाबय गीत सेहो सहरसे धरि प्रदर्शित भेल रहैक, जकरा बाद एखन धरि सहरसो सँ मैथिली सिनेमा निपत्ते रहल अछि। सैह कतेक आह्लादकारी दिन थिक आइ एम्हर दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, मधेपुरा,पूर्णिया तँ ओम्हर वीरगंज सँ विराटनगर धरि एक संग मैथिली फिल्मक उपस्थिति। एखन धरिक मैथिलीक ब्लॉकबस्टर सस्ता जिनगी महग सेनूर सेहो तीन जिला सँ बाहर नहि निकलि सकल छल। निश्चित ई नव मोड़ थिक मैथिली फिल्मक।  मैथिली फिल्म खाली फेसबुके टा पर रिलीज होइत अछि, हॉल नहि भेटैत अछि आदि सन जुमला छहोछित्त भए रहल अछि आइ। यैह सब सोचैत रहलहुँ भरि बाट आ ११ :५० मे बिहारीगंजक राधिका टॉकिज पर पहुँचि गेल रही। सामान्य भीड़ छलै हॉलक बाहर, केओ प्रेमक बसातक पोस्टर देखैत, तँ केओ टिकट खिड़की लग। हमहूँ ड्राइवर सँ टिकट मंगवा दुनू गोटे प्रवेश कएलहुँ । ड्राईवर गगनदेव यादव आइ पहिल बेर कोनो मैथिली फिल्म देखताह।

 १२: ०५ बजे तेसर घंटी घनघनायल, सीट पर संच मंच बैसि गेल छी, हॉल लगभग ६० प्रतिशत सीट पर दर्शकक उपस्थिति अछि। आब लाइट ऑफ भेल आ परदा पर आरम्भ भए गेल प्रेमक बसात ….एकटक देखि रहल छी….देखने जा रहल छी। कखनहुँ खुशी, कखनहुँ संतोष तँ कखनहुँ तामश होइत अछि। मध्यान्तर मे बहराइत छी आ कने धुँइयाइत फेर घुरि कए  सीट पर अबैत छी, परदा पर स्वच्छ भारतक कोनो विज्ञापन चलि रहल अछि। गगनदेवक कान मे पूछैत छी ‘केहेन लगलऽ फिलिम’ ? -“बलू निरहुआ आर खेसारी के फिलिम से निम्मन लागल सर”। ओकर जवाब रहै। फिल्मक आगूक भाग आरम्भ भए गेल अछि। नायक मोहन (पीयूष कर्ण) सँ उबि गेल छी तँ नायिका माहिरा (रैना बनर्जी) कतहुँ सँ अभिनय मे माहिर तँ नहिए जकाँ। मुदा शेष चरित्र सभ अभिनय मे बान्हि लेने छथि। गंगाजलक दारोगाजी एस सी मिश्रा अब्दुलक चरित्र मे सशक्त तँ  जीतू सम्राट सभ पर भारी। कुणाल ठाकुर आ आशुतोष सागरक अभिनय उम्दा, मुदा पटकथा मे जेना आर जगह देल जेबाक चाही एहि चरित्र सभ केँ। प्रज्ञा झा प्रभावित केलीह तँ गोविन्द पाठकक परमानेन्ट गेटअप केँ बदलबाक जरूरत लागल।

आब हॉल सँ बहार आबि गेल छी, चाहक दोकान पर छी…मन सँ रूपक शरर लेल वाह आ आह दुनू निकलैत अछि। प्रेमक बसातक कथा विचार कोनो नव नहि अछि फिल्म जगतक लेल, मुदा तकरा मैथिली फिल्मक विषय बनायब कने रिस्क छल, किएक तँ एखनहुँ मैथिली फिल्म वियाह, सेनूर, पाग, माछ, मखान सँ आगू नहि आयल अछि आ तें निर्देशक शररक सराहना करय चाहब। हाँ संवाद पक्ष कमजोर जकाँ रहलनि अछि, जाहि मे ओ कोनो योग्य लोकक मदति लए सकैत छलाह । संप्रति फिल्मक मुख्यतः तीन धारा अछि….व्यावसायिक, कला आ यथार्थवादी । प्रेमक बसात यथार्थवादी फिल्म तँ  नहिये अछि । व्यावसायिक आ कला मध्य विचार करय पड़त। हमर मानब अछि जे एहि फिल्मक विषय वस्तु कला फिल्मक छल जकरा व्यावसायिक रूप देबाक प्रयास केलनि अछि आ तें फिल्म कतहु-कतहु ओझराइत-ओझराइत सम्हरल अछि । जँ सम्पूर्णता मे कला फिल्म बनितय तँ ई सिनेमा समकालीन भारतीय सिनेमाक समकक्ष ठाढ़ भए सकैत छल। मुदा व्यावसायिक प्रयोग केँ सफलतम तँ नहि, नीक अवश्य कहल जायत। जँ बिहारी सिनेमाक परिप्रेक्ष्य मे कही तँ  प्रेमक बसात एकटा सार्थक शुरूआत अछि बिहार आ मैथिली फिल्म दुनू लेल । प्रवेश मल्लिकक संगीत मे नैन अटकल….आ सरोज सुमनक संगीत मे सूफी गीत मैथिली लेल उपलब्धि अछि । आदित्यनारायण वाला गीत मे शब्द सभ केँ जबरदस्ती अंटायल गेल अछि तथापि कर्णप्रिय अछि । ललमुनियां के तारी नीक , सोझे सरोज मिश्रक मैनाक बच्चा सिहुलिया रे….मोन पाड़ि दैत अछि । नरेन्द्र पटेलक सिनेमेटोग्राफी उत्कृष्ट, कतहु हूसल सन नहि । ध्वनि प्रभाव, संपादन उच्च कोटिक अछि ।

आब आबी संवाद आ तकर भाषा पर…..एहि फिल्मक किछु दृश्य मे हिन्दी संवादक प्रयोग पर एखन विभिन्न चर्च भए रहल अछि । हम जे देखल ताहि आधार पर कहब जे संवाद मे हिन्दीक प्रयोग पूर्णतः निर्देशकक परिकल्पना थिक, जकरा मैथिलियो मे राखल जा सकैत छल । मुदा एतय मोन पाड़ब जे मैथिलीक पहिल फिल्म ‘कन्यादान’ मे २० प्रतिशत संवाद हिन्दी मे छल, तँ  एक दशक पूर्व आयल ‘आउ पिया हमर नगरी’मे चारिटा पात्र मध्यान्तर तक हिन्दीए मे बतियाइत छथि आ बादक किछु दृश्य मे सेहो । तहिना वॉलीवुडक चर्चित अभिनेता अशोक कुमार हिन्दी फिल्म हाटे बजारे मे सम्पूर्ण संवाद मैथिली मे बाजल छथि आ हुनक फिल्मी परिवार सेहो । मुदा हाटे बजारे हिन्दी फिल्म अछि ।भारतीय फिल्म सेंसर बोर्ड कोनो फिल्म मे निर्धारित सीमा सँ बेसी आन भाषाक प्रयोग भेला पर उक्त फिल्म केँ द्विभाषिक (बाइ लिंग्ल्वल) घोषित कए दैत छैक । तें प्रेमक बसात कोन श्रेणी मे से जाइए से फिल्मक आरम्भिक सर्टिफिकेट केँ देखि अकानल जा सकैत अछि । एखन एतबे कहब जे प्रेमक बसात एक उत्कृष्ट फिल्म तँ अछिये, प्रदर्शनक आधार पर मैथिली फिल्म लेल मीलक पाथर सिद्ध भेल अछि ।

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[किसलय कृष्ण मैथिली जगतक एक गोट  बेस चिन्हार आ लोकप्रिय नाओं छथि। विगत कइएक बर्ख सँ किसलय जी मैथिली साहित्य, रंगमंच, सिनेमा, मंच उद्घोषणा आदि-आदि क्षेत्र मे अपन सक्रियता एवं विशिष्टता सँ पाठक/ दर्शक/ श्रोता लोकनिक मध्य अपन फराक पहिचान स्थापित करबा मे सफल रहलनि अछि। मैथिली सिनेमाक इतिहास‘ शीर्षक सँ मैथिली सिनेमा केन्द्रित हिनक पोथी शीघ्र प्रकाश्य अछि, जे उक्त विषय पर अपना तरहक प्रायः पहिलुक पोथी होएत। हिनका सँ 09560249550  पर सम्पर्क कएल जा सकैत अछि ]

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