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कविता

पाँच गोट कविता : रोमिशा

रोमिशा मैथिली कविताक प्रतिनिधि स्त्री स्वरक रूप मे स्थापित भए रहलीह अछि। सम्बन्ध आ समजाक द्वन्द मे स्त्रीक चिर्रीचोथ होइत अस्तित्वक तसदीक करैत हिनक कविता स्त्रीक अव्यक्त मनोभावक सार्थक चित्रण प्रस्तुत करैत अछि। प्रतिकारक सामर्थ्य आ वस्तु-विषयक महीन विश्लेषण एहि कविता सभक ‘ट्रेडमार्क’अछि आ अपन टोन मे लाउड रहितहुँ सम्प्रेषण सामर्थ्य सँ कविता कथ्यक निजता केँ स्थापित करैत अछि। प्रेम आ वासनाक मध्य चुल्हिक आगि सँ सीधैत स्त्री जीवनक धुकधुकी हियासैत रोमिशा अपन कविता सँ स्त्री विमर्शक नव दृष्टिकोण ठाढ़ करैत छथि। रोमिशा जी एखन सम्प्रति दिल्ली मे रहि रहलीह अछि। हिनक पहिल काव्य संग्रह प्रकाशनाधीन छनि

मनोज शांडिल्य केर किछु टटका कविता

आइ-काल्हि कविता पर खूब काज कऽ रहल छथि मनोज शांडिल्य. जल्दीए हिनक काव्य संग्रह सेहो बहरायत. आइ ई-मिथिला पर हिनक किछु टटका कविता देल जा रहल अछि. एहि कविता सभमे समाजमे व्याप्त भुखमरी, हिंसा ,आत्महत्या, अत्याचार’क प्रति कविकेँ दर्द साफ देखल जा सकैछ. अहाँ सेहो पढ़ू – माॅडरेटर.

कथा

कथा :: लाथ

अशोक जीक कथा : लाथ

मंडल अयला तं कहलियनि, एकटा रंगीन कुरता किनबाक अछि. पैजामा सेहो. सोचैत रही जे अहां आएब तं बजार चलब’. हुनकर ठोर पर आने दिन जकां बिहुंसी अयलनि. फेर जोर सं हमरा संग हाथ मिलौलनि. ई हुनकर हिस्सक छनि. बजला मुदा प्रश्नवाचक जकां, पक्का ?
-‘हँ एकदम्म पक्का ! लाॅक क’ दिऔ’. ओ जोर सं हंसला. हाथ पकड़नहि पूछलनि, ‘कहिया चलब ?’
-‘आइ, एखनहि.’ हम जवाव देलियनि. हमर चेहरा पर परिवर्तन देखार छल. मंडल बूझि गेला.

श्याम दरिहरेक कथा बड़की काकी एट हॉटमेल डॉट कॉम

मैथिलीक प्रतिष्ठित कवि-कथाकार श्याम दरिहरे कें विगत २१ दिसम्बर कें साहित्य अकादेमी दिस सँ बर्ख २०१६ ‘क मैथिलीक मूल पुरस्कार देबाक घोषणा कयल गेलनि अछि. ई पुरस्कार हुनका बर्ख २०१३ मे, नवारम्भ सँ प्रकाशित कथा संग्रह ‘बड़की काकी एट हॉटमेल डॉट कॉम’ लेल देल जेतनि. आइ अपने  समस्त ऑनलाइन पाठक लेल ‘ई-मिथिला’ पर एही पोथीक शीर्षक कथा  ‘बड़की काकी एट हॉटमेल डॉट कॉम’ देल जा रहल अछि, पढ़ल जाउ- मॉडरेटर.

समीक्षा

एहि अश्लील समयक मादे किछु अस्फुट टिप्पणी – बालमुकुन्द

गप्पक आरम्भ करैत मे एकटा ‘अजीब’ प्रकारक बोध भए रहल अछि-की एहिठाम एही प्रकारक गप्प उठएला किंवा नहिए उठएला सँ की फरक पड़ैत अछि ? अंतःकरण सँ बेर-बेर प्रश्न उठैत अछि जे हमरा एहिठाम किछु लिखिएक की कए लेबैक ? प्रतिउत्तर मे  हमहुँ बेर-बेर पुछैत छियैक की हमरा चुप्पी सँ सेहो  की भए जेतैक !

प्रेमक बसात मे बहैत वा बहकैत हमर लेखनी

२ नवम्बर, २०१८ भोर ९:३० मे किरायाक स्कार्पियो पर सवार भए  सहरसा सँ बिहारीगंज लेल विदा भए  गेल छी। बिहारीगंज मने मधेपुरा जिलाक एकटा कस्बा। जेबाक कारण अछि बहुप्रतीक्षित मैथिली फिल्म ‘प्रेमक बसात’ जे आइ मिथिला क्षेत्रक ३१ गोट विभिन्न सिनेमाघर मे रिलीज भए  रहल अछि आ ताहि मे सँ एकटा अछि बिहारीगंजक राधिका टॉकिज।

‘ई-मिथिला’ पूर्णतया मैथिली भाषा आ साहित्य केँ समर्पित ई-पत्रिका अछि. एहिठाम प्रस्तुत सामग्री लेखकक अनुमतिक बिनु नहि प्रकाशित कएल जाइत अछि. एहि पत्रिकाक एक्कहुँ अंश कोनहुँ रूप किंवा कोनहुँ माध्यम, जाहि मे सूचना संग्रहण आ सूचना संसाधनक विधि आदि सम्मिलित अछि, द्वारा प्रकाशक अथवा संपादकक पूर्वानुमतिक बिनु पुनरुत्पादित नहि कएल जा सकैत अछि मात्र एकगोट समीक्षकक जे समीक्षा हेतु संक्षिप्त अंश उद्धृत कए सकैत अछि. प्रकाशित कृति सभक कॉपीराइट लेखक / अनुवादक / कलाकारक छनि.
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